दो थपर लगाती और प्यार से खाना भी खिलाती हैं।

वो कोई और नहीं जनाब मेरी माँ हैं जो आज भी मेरे पसंद का खाना बनाती हैं।।



जिस हाथ से वो थपर लगाती हैं।

उसी हाथ से प्यार से खाना भी खिलाती है।

वो कोई और नहीं हैं जनाब मेरी माँ हैं,

जो आज भी मेरे पसंद का ही खाना बनाती हैं।।